जि़न्दगी में एक पल.
आया बस एक ही पल के लिए ......
और दे गया पूरी की पूरी
एक जि़न्दगी
उम्र तो चुक गयी है मेरी
कह गयी है अलविदा मुझ से
घुट गयी हैं मेरी सांसें
मै पत्थर हो गया हूं
बस जिये जा रहा हूं
वही एक पल
जि़न्दगी में एक पल.
आया बस एक ही पल के लिए ......
और दे गया पूरी की पूरी
एक जि़न्दगी
उम्र तो चुक गयी है मेरी
कह गयी है अलविदा मुझ से
घुट गयी हैं मेरी सांसें
मै पत्थर हो गया हूं
बस जिये जा रहा हूं
वही एक पल
कौन देता है जान, कौन किसके लिए मरता है ।
हर शख्स यहां अपने ही लिए जीता-मरता है ।।
नहीं ऐसा मिला कोई जो कहे कि तेरा हूं मैं,
मैं हूं बस उसी का हर-एक यही दम भरता है ।।
जो न आए हैं अब तक, वो अब न आएंगे,
किसको फुर्सत है तू किसका इंतजार करता है ।।
यह दिन किया था तय नसीब ने तेरी मौत के लिए,
तूने जान दी उन पर, कौन इसका यकीन करता है ।।
जी तो बहुत करता है कि मुहब्बत में जान दे दूं मै,
पर बेमुरर्वत इस जहान में मुहब्बत कौन करता है ।।
पहर-दर-पहर
खूंखार होते उस आदमखोर दिन से
कितने यत्नों से
सहेज कर रखी होंगी यह निशब्द थपकियां
इस खामोश रात ने
मेरे लिए